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    Garib das vani

    गरीब, 
    पतिब्रता चूके नहीं, साखी चंदर सूर।
    खेत चढे सें जानिये, को कायर को सूर।।

    भावार्थ :- यदि वास्तव में दृढ़ भक्त (पतिव्रता आत्मा) है तो वह कभी अपने धर्म-कर्म
    मर्यादा में चूक (त्राटि) नहीं आने देगा। इसके साक्षी चंदर (चाँद=डववद) तथा सूर
    (सूरज) हैं। भावार्थ है कि जिस तरह सूर्य और चन्द्रमा अपनी गति को बदलते नहीं,
    दृढ़ भक्त भी ऐसे ही अटल आस्थावान होता है। उसकी परीक्षा उस समय होगी जब कोई
    आपत्ति आती है। जैसे कायर तथा शूरवीर की परीक्षा युद्ध के मैदान में होती है।

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