कृतघ्नी पुत्र
कृतघ्नी पुत्रा
एक व्यक्ति के दो पुत्रा थे। फौज से सेनानिवृत था। पैंशन बनी थी। पुत्र
अलग-अलग हो गए। छोटे पुत्र ने माता को अपने घर पर रख लिया क्योंकि बच्चे
छोटे थे। माता उनकी देखरेख के लिए चाहिए थी। बड़े बेटे पिता आ गया।
पिता ने कहा कि मैं पैंशन के रूपये उसको दूँगा जिसके रोटी खाऊँगा। छोटा बेटा
कहता था कि आधी-आधी पैंशन बाँट दिया करे। पिता ने मना कर दिया तो एक
दिन पिता के सिर में लाठी मारी। पिता तुरंत मर गया। लड़के को आजीवन
कारावास की सजा हो गई।
व्यक्ति को पुत्र प्राप्त होने के कारण उसके दर्शन शुभ
माने जाते थे जिसके साथ अशुभ हो गया। अब आध्यात्मिक तराजू (ठंसंदबम) में
तोलकर देखते हैं कि बिना संतान वाले के दर्शन शुभ हैं या अशुभ?
जैसे कि परिवार संस्कार से बनता है। कोई कर्ज उतारने
के लिए पिता-पुत्रा, पत्नी, माता-पिता, बहन-भाई आदि के रूप में जन्म लेकर
परिवार रूप में ठाठ से रहते दिखाई देते हैं, परंतु कई युवा अवस्था में मर जाते
हैं। कई विवाह होते ही मर जाते हैं। ये सब अपना ऋण पूरा होते ही अविलंब शरीर
त्याग जाते हैं। जिनको संतान नहीं हुई है, उनका कोई लेन-देन शेष नहीं है। वे
यदि पूर्ण गुरू से दीक्षा लेकर भक्ति करें तो उन जैसा सौभाग्यवान कोई नहीं है।
न किसी के जन्म की खुशी, न मृत्यु का दुःख। उन बिना औलाद वालों का दर्शन
तो अति शुभ है। यदि भक्ति नहीं करते तो चाहे औलाद (संतान) वाले हों, चाहे
बेऔलादे (बिना संतान वाले) दोनों ही अपना जीवन नष्ट कर जाते हैं। यदि भक्ति
करते हैं तो दोनों के दर्शन शुभ हैं।
ऐसी ही आध्यात्मिक ज्ञान के विषय में अधिक जानकारी के लिए देखिए प्रत्येक रोज शाम 7:30 बजे साधना टीवी दोपहर 2:00 बजे श्रद्धा टीवी तत्वदर्शी सतगुरु संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन
और पढ़िए उनके द्वारा लिखित पुस्तक ज्ञान गंगा जीने की राह गीता तेरा ज्ञान अमृत
एक व्यक्ति के दो पुत्रा थे। फौज से सेनानिवृत था। पैंशन बनी थी। पुत्र
अलग-अलग हो गए। छोटे पुत्र ने माता को अपने घर पर रख लिया क्योंकि बच्चे
छोटे थे। माता उनकी देखरेख के लिए चाहिए थी। बड़े बेटे पिता आ गया।
पिता ने कहा कि मैं पैंशन के रूपये उसको दूँगा जिसके रोटी खाऊँगा। छोटा बेटा
कहता था कि आधी-आधी पैंशन बाँट दिया करे। पिता ने मना कर दिया तो एक
दिन पिता के सिर में लाठी मारी। पिता तुरंत मर गया। लड़के को आजीवन
कारावास की सजा हो गई।
व्यक्ति को पुत्र प्राप्त होने के कारण उसके दर्शन शुभ
माने जाते थे जिसके साथ अशुभ हो गया। अब आध्यात्मिक तराजू (ठंसंदबम) में
तोलकर देखते हैं कि बिना संतान वाले के दर्शन शुभ हैं या अशुभ?
जैसे कि परिवार संस्कार से बनता है। कोई कर्ज उतारने
के लिए पिता-पुत्रा, पत्नी, माता-पिता, बहन-भाई आदि के रूप में जन्म लेकर
परिवार रूप में ठाठ से रहते दिखाई देते हैं, परंतु कई युवा अवस्था में मर जाते
हैं। कई विवाह होते ही मर जाते हैं। ये सब अपना ऋण पूरा होते ही अविलंब शरीर
त्याग जाते हैं। जिनको संतान नहीं हुई है, उनका कोई लेन-देन शेष नहीं है। वे
यदि पूर्ण गुरू से दीक्षा लेकर भक्ति करें तो उन जैसा सौभाग्यवान कोई नहीं है।
न किसी के जन्म की खुशी, न मृत्यु का दुःख। उन बिना औलाद वालों का दर्शन
तो अति शुभ है। यदि भक्ति नहीं करते तो चाहे औलाद (संतान) वाले हों, चाहे
बेऔलादे (बिना संतान वाले) दोनों ही अपना जीवन नष्ट कर जाते हैं। यदि भक्ति
करते हैं तो दोनों के दर्शन शुभ हैं।
ऐसी ही आध्यात्मिक ज्ञान के विषय में अधिक जानकारी के लिए देखिए प्रत्येक रोज शाम 7:30 बजे साधना टीवी दोपहर 2:00 बजे श्रद्धा टीवी तत्वदर्शी सतगुरु संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन
और पढ़िए उनके द्वारा लिखित पुस्तक ज्ञान गंगा जीने की राह गीता तेरा ज्ञान अमृत

Wow
जवाब देंहटाएंकबीर परमेश्वर जी कहते हैं कि एक लेबा एक देवा दूतम, कोई किसी का पिता न पूतम । ऋण संबंध जुड़े सब ढाढा , अंत समय सब बारा बाटा ।।
जवाब देंहटाएंमानुष जन्म दुर्लभ है ,मिले ना बारंबार ।तरुवर से पत्ता टूट गिरे, फिर बहुर ना लगता डार ।।
जवाब देंहटाएं