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    भक्त नंदा नाई (सैन) की कथा

     ‘‘भक्त नंदा नाई (सैन) की कथा’’

    नाई समुदाय में एक महान भक्त नंदा जी हुए हैं। नाई को सैन भी कहते हैं। वे

    परमात्मा की धुन (लगन) में लगे रहते थे। राजा के निजी नाई थे। प्रतिदिन राजा की

    हजामत करने (दाढ़ी काटने) जाया करते थे। राजा के सिर की मालिश करने भी जाते थे।


    नंदा नाई की कथा nanda nai ki katha
    नंदा नाई की कथा


    भक्त नंदा जी एक दिन भगवान की भक्ति में इतना मग्न हो गया कि उसको ध्यान नहीं रहा

    कि मैंने राजा की हजामत करने जाना था। राजा की सेव (दाढ़ी बनाने) करने जाने का

    निर्धारित समय था। वह समय जा चुका था। दो घण्टे देर हो चुकी थी। राजाओं की जुबान

    पर दण्ड रहता था। जो भी नौकर जरा-सी गलती करता था तो उसको बेरहमी (निर्दयता)

    से कोड़ों से पीटा जाता था। अचेत होने पर छोड़ा जाता था। शरीर की खाल उतर जाती

    थी। रो-रोकर बेहोश हो जाता था। यह दृश्य (ैममद) भक्त नंदा कई नौकरों के साथ देख

    चुके थे। आज उनको वही भय सता रहा था। काँपते-काँपते राजा के निवास पर पहुँचे। राजा

    के पैरों में गिरकर देर से आने की क्षमा याचना करने लगा। कहा कि माई-बाप आगे से कभी

    गलती नहीं करूँगा। भक्त ने देखा कि राजा की दाढ़ी बनाई हुई थी। सिर में मालिश भी

    कर रखी थी। भक्त सैन को समझते देर नहीं लगी कि किसी अन्य नाई से हजामत तथा

    मालिश कराई है। राजा ने पूछा कि हे हजाम (हजामत करने वाला यानि नाई)! आप क्या

    कह रहे हो? आप पागल हो गये हो क्या? भक्त नंदा जी ने कहा, महाराज! आज मुझे ध्यान

    ही नहीं रहा, मैं भूल गया। मैं आपके दाढ़ी बनाने के समय पर नहीं आया। जीवन में पहली

    व अंतिम गलती है। कभी नहीं करूँगा। उसका विलाप सुनकर रानी तथा अन्य मंत्रा भी आ

    गए थे। राजा ने कहा कि सैन! आप अभी-अभी दाढ़ी बनाकर सिर में मालिश करके गए हो।

    आप क्या कह रहे हो? आप देर से आए हो। क्या नींद में बोल रहे हो? भक्त नंदा जी ने

    कहा कि नहीं महाराज! आपने किसी अन्य नाई से हजामत कराई है। मैं तो अभी-अभी आया

    हूँ। राजा ने सैन भक्त के घर पर मंत्रा भेजकर पता कराया तो उनकी पत्नी भी रो रही थी

    कि आज पति देर से गए हैं, उनको दण्ड दिया जा रहा होगा। मंत्रा ने पूछा कि क्यों रो रही

    हो बहन? भक्तमती ने बताया कि मेरे से गलती हो गई। मैंने भक्त को याद नहीं दिलाया।

    भक्ति पर बैठने से पहले भक्त ने कहा था कि कुछ समय पश्चात् मुझे याद दिलाना कि राजा

    की सेवा करने जाना है। मैं भी भूल गई, भक्त भी भक्ति में व्यस्त थे। दो घण्टे बाद उठे तो

    याद आया। उनकी नौकरी जाएगी तो हम क्या खाएँगे? बच्चे भूखे मर जाएँगे। पति को दण्ड

    मिलेगा। मंत्रा जी तुरंत वापिस आए और राजा से बताया कि वास्तव में नंदा तो देर से अभी

    आया है। इनके रूप में कोई और आया था जो आपकी हजामत तथा मालिश करके चला

    गया। यह बात सुनकर राजा को समझते देर नहीं लगी कि भक्त सैन के रूप में भगवान

    आए थे। राजा सिंहासन से नीचे आया और भक्त सैन जी को सीने से लगाया और कहा कि

    भक्त! मैं तेरे को सेवा से मुक्त करता हूँ। तेरे को राजदरबार में दरबारी रखता हूँ। मेरे को

    दोष लगा है कि भक्त के स्थान पर भगवान ने मेरी दाढी़ बनाई, सिर की मालिश की। 

    राजा भरथरी की कथा

    मैं

    इस पाप को कैसे धो पाऊँगा? नंदा जी भी समझ गए कि मेरे कारण परमात्मा को कष्ट हुआ

    तो और जोर-जोर से रोने लगे कि हे परवरदिगार! मुझ दो कोड़ी के दास के कारण आप

    स्वर्ग छोड़कर हजाम (नाई=सैन) बने। मुझे उठा देते भगवान। आपको कष्ट उठाना नहीं

    पड़ता। मैं समय पर आ जाता। इसलिए वाणी के माध्यम से बताया है कि सच्चे भक्त पर

    परमात्मा ऐसे कृपा करते हैं।

    ऐसी ही सच्ची घटना और भक्ति की राहे के लिए पढ़े पुस्तक PDF FILE  ज्ञान गंगा    /    जीने की राह

    पूर्व जन्म का ऋण

    nanda nai ki katha
    nanda nai ki katha



    2 टिप्‍पणियां:

    1. इस कहानी को पढ कर ये समझ आया कि भक्ति में लगे रहो ,पहले महत्व भक्ति को देना चाहिए,पीछे से भगवान हमारी मदद करने ज़रूर आते है,
      पतिव्रता ज्यो ज्यो जमीं पर रखे है पाव।
      समरथ झाड़ू देत है, कांटा न लग जाय

      जवाब देंहटाएं
    2. #कबीरजी_के_रहस्यमयीदोहे



      Kabir Prakat Diwas

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